सियासी नशे पर भारी पड़ता अस्पताल का 'लाल लहू - रोहित कुमार कनौजिया उस वक़्त उतर जाता है, जब अस्पताल में सिर्फ़ खून की ज़रूरत पड़ती है।

सियासी नशे पर भारी पड़ता अस्पताल का 'लाल लहू
संपादक की कलम से सहयोग: रोहित कुमार कनौजिया, सिटीज़न वॉयस संवाददाता, औरास उन्नाव
उन्नाव। औरास विकास खंड के क्षेत्रीय मुद्दों और किसानों की आवाज़ बुलंद करने वाले प्रखर किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया ने वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिवेश पर एक तीखा प्रहार किया है। हाल ही में एक जनसंवाद के दौरान उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों और समाज में फैलते धार्मिक व जातिगत उन्माद पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, "धर्म और जाति का नशा उस वक़्त उतर जाता है, जब अस्पताल में सिर्फ़ खून की ज़रूरत पड़ती है।"
रोहित कुमार कनौजिया का यह बयान उस समय आया है जब समाज में विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे बुनियादी मुद्दों के बजाय पहचान की राजनीति को हवा दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि औरास और हसनगंज जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार है, जबकि राजनीति केवल भावनाओं के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है।
अस्पताल की दहलीज और कड़वी हकीकत
संपादकीय दृष्टि से देखें तो यह कथन उस कड़वे सच को उजागर करता है जिसे अक्सर चुनावी रैलियों में दबा दिया जाता है। जब कोई गंभीर मरीज औरास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) या जिला अस्पताल की ओर भागता है, तब उसकी प्राथमिकता 'धर्म' नहीं बल्कि 'डॉक्टर' और 'इलाज' होती है। वहां खड़ा तीमारदार यह नहीं पूछता कि डोनर हिंदू है या मुसलमान, बल्कि वह बस अपने प्रियजन की जान बचाने के लिए खून की गुहार लगाता है।
किसानों और आम जन का आह्वान
किसान नेता ने यह संदेश दिया है कि किसान और गरीब मजदूर का कोई अलग धर्म नहीं होता; उसकी सबसे बड़ी पहचान उसकी मेहनत और उसका संघर्ष है। उन्होंने सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि यदि अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन और दवाएं नहीं हैं, तो धर्म और जाति के नाम पर जनता को उलझाना केवल एक राजनीतिक छलावा है।
निष्कर्ष
रोहित कुमार कनौजिया का यह बयान जनपद के उन तमाम लोगों के लिए एक गंभीर संदेश है जो सोशल मीडिया या चौक-चौराहों पर जातिगत श्रेष्ठता की बहस में उलझे रहते हैं। औरास की गलियों से उठी यह आवाज़ यह याद दिलाने के लिए काफी है कि इंसानियत का रंग लाल है और वह किसी भी सियासी नशे से बड़ा है।
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