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Showing posts from February, 2026

जयंत चौधरी vs रोहित कनौजिया: ततैया और हलवाई वाली जंग! जब किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया ने जयंत चौधरी की तुलना हलवाई की दुकान पर बैठे ततैया से की, तो जवाब भी उतना ही तीखा आया। जयंत चौधरी ने साफ कर दिया कि वो सत्ता की मिठास के शौकीन नहीं हैं।

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'ततैया और हलवाई' वाले तंज पर जयंत का पलटवार: बोले- "मुझे मीठे का शौक नहीं" किसान राजनीति में छिड़ी 'जुबानी जंग', रोहित कनौजिया के कटाक्ष पर केंद्रीय मंत्री का तीखा जवाब औरास उन्नाव किसान राजनीति के गलियारों में इन दिनों बयानबाजी का पारा चढ़ा हुआ है। अमेरिका से ट्रेड डील को लेकर शुरू हुआ विवाद अब 'हलवाई और ततैया' के किस्से तक पहुँच गया है। किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया द्वारा कसे गए तंज पर पलटवार करते हुए रालोद अध्यक्ष और केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने साफ कर दिया है कि वह झुकने वाले नहीं हैं। क्या था मामला? हाल ही में उन्नाव के औरास में एक जनसभा के दौरान किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया ने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर सरकार का बचाव करने के लिए जयंत चौधरी को निशाने पर लिया था। कनौजिया ने एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए कहा था: > "जयंत चौधरी की स्थिति उस ततैया जैसी है जो हलवाई की दुकान पर मिठाई पर तो बैठता है, लेकिन हलवाई को नहीं काटता। वह सरकार में हैं, इसलिए मजबूरी में सरकार का ही पक्ष लेंगे और उनके खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे।" >  जयंत का ...

देश व प्रदेश में जो परिवर्तन की राजनीति चल रही है, उसे कामयाब बनाएं : किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया

किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया का यह आह्वान वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में काफी महत्व रखता है। उनका संदेश स्पष्ट है: जनता और किसानों की सक्रिय भागीदारी ही वास्तविक परिवर्तन का आधार है। इस विचार को सफल बनाने के लिए कुछ प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है: 1. जमीनी स्तर पर एकजुटता परिवर्तन की राजनीति तभी कामयाब होती है जब वह ड्राइंग रूम से निकलकर खेतों और गांवों तक पहुँचे। रोहित कनौजिया जैसे नेता अक्सर इसी 'ग्रासरूट' जुड़ाव पर जोर देते हैं ताकि नीतियों में किसानों की सीधी भागीदारी हो। 2. मुद्दों पर आधारित राजनीति जाति या धर्म के बजाय, राजनीति को बुनियादी जरूरतों की ओर मोड़ना आवश्यक है:  * एमएसपी (MSP): फसलों का लाभकारी मूल्य।  * रोजगार: ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर अवसर।  * शिक्षा और स्वास्थ्य: गाँव के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच। 3. युवाओं की भूमिका रोहित कुमार कनौजिया जैसे युवा नेता यह संकेत देते हैं कि अब नई पीढ़ी को राजनीति के पुराने ढर्रे को बदलकर उसे 'जवाबदेह' बनाना होगा।  "परिवर्तन केवल नारों से नहीं, बल्कि सही नीतियों और उन्हें लागू करने की ...

जब तक किसान कर्ज मुक्त नहीं होगा, तब तक देश वास्तव में आत्मनिर्भर नहीं बन सकता।" — रोहित कुमार कनौजिया

अन्नदाता के हक की आवाज़: केसीसी कर्ज माफी योजना को दोबारा लागू करने की मांग प्रस्तावना भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसान आज एक बार फिर अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर आंदोलित हैं। हाल ही में प्रमुख किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी है— 'किसान केसीसी (Kisan Credit Card) कर्ज माफी योजना' को दोबारा शुरू करना। कनौजिया का तर्क है कि बेमौसम बारिश, खाद-बीज की बढ़ती कीमतों और फसलों के अनिश्चित भाव ने किसानों को कर्ज के ऐसे चक्रव्यूह में फंसा दिया है जिससे निकलना उनके बस के बाहर हो रहा है। आखिर क्यों जरूरी है कर्ज माफी? लेख में रोहित कुमार कनौजिया के विजन को स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है: बढ़ती उत्पादन लागत: पिछले कुछ वर्षों में डीजल, कीटनाशक और श्रम की लागत में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन उस अनुपात में किसानों की आय नहीं बढ़ी। प्रकृति की मार: जलवायु परिवर्तन के कारण कभी सूखा तो कभी अत्यधिक वर्षा ने फसलों को बर्बाद कर दिया है, जिससे किसान केसीसी का ब्याज भरने में भी असमर्थ हो गए हैं। आर्थिक सुरक्षा चक्र: कर्ज माफी...

धर्म और जाति के चक्रव्यूह में फंसे योगी? किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया का तीखा हमला

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धर्म और जाति के चक्रव्यूह में फंसे योगी? किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया का तीखा हमला लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानों का पारा चढ़ा हुआ है। भारतीय राजनीति में 'सुशासन' और 'कठोर निर्णय' के पर्याय माने जाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब विरोधियों के निशाने पर हैं। प्रखर किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया ने हाल ही में प्रदेश की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सीधे मुख्यमंत्री पर प्रहार किया है। कनौजिया का तर्क है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच, उत्तर प्रदेश की सत्ता असल में धर्म और जाति के चक्रव्यूह में उलझकर रह गई है। चक्रव्यूह में घिरी नीतियां: कनौजिया के तर्क रोहित कुमार कनौजिया ने अपने संबोधन में कुछ प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया है, जो वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं:  * किसान बनाम जातिगत राजनीति: कनौजिया का कहना है कि किसान की कोई जाति या धर्म नहीं होता। लेकिन सरकार किसानों की मूल समस्याओं (जैसे एमएसपी, आवारा पशु और खाद की किल्लत) को सुलझाने के बजाय, वोट बैंक के गणित के अनुसार जातियों को साधने में लगी है।  * धार्मिक...

यूपी में किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया V/S ब्रजेश पाठक शंकराचार्य के अपमान पर छिड़ी जंग!

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सत्ता के साझीदार हैं तो पाप से बच नहीं सकते उपमुख्यमंत्री: रोहित कुमार कनौजिया लखनऊ/उत्तर प्रदेश | उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों बयानों के तीर तीखे होते जा रहे हैं। ताजा मामला उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रखर किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया के बीच छिड़ी जुबानी जंग का है। शंकराचार्य के अपमान को लेकर उपमुख्यमंत्री द्वारा दिए गए 'पाप' वाले बयान पर किसान नेता ने उन्हें आईना दिखाते हुए सीधे इस्तीफे की मांग कर दी है। गौरतलब है कि बीते दिनों उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक बयान जारी कर कहा था कि "शंकराचार्य का अपमान करने वालों पर पाप पड़ेगा।" उनके इस बयान पर पलटवार करते हुए किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया ने सख्त तेवर अपनाए। कनौजिया ने कहा कि केवल धर्म और पाप-पुण्य की दुहाई देकर उपमुख्यमंत्री अपनी संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। "इस्तीफा देकर पेश करें मिसाल" रोहित कुमार कनौजिया ने सीधे शब्दों में कहा, "यदि उपमुख्यमंत्री को शंकराचार्य का अपमान इतना ही विचलित कर रहा है और वे इसे पाप मानते हैं, तो उन्हें तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे द...

जनहित में हुंकार: गरीब किसान-मजदूर ही इस देश का असली मालिक है- रोहित कुमार कनौजिया

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जनहित में हुंकार: गरीब किसान-मजदूर ही इस देश का असली मालिक है- रोहित कुमार कनौजिया  "खेत की मिट्टी में पसीना बहाने वाला और कड़कड़ाती ठंड में सीमा पर खड़े जवान का पेट पालने वाला किसान ही इस लोकतांत्रिक भारत का भाग्यविधाता है। विडंबना यह है कि जो देश की नींव है, वही आज हाशिए पर खड़ा है।" प्रमुख युवा किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया के ये शब्द महज एक बयान नहीं, बल्कि उस कड़वी सच्चाई का आईना हैं जिसे आज का आधुनिक भारत अनदेखा कर रहा है। उनका तर्क सीधा और स्पष्ट है: किसान और मजदूर इस देश के असली मालिक हैं, लेकिन वे अपनी ताकत को भूल बैठे हैं। सत्ता की चाबी: संगठित होने की जरूरत रोहित कुमार कनौजिया का मानना है कि लोकतंत्र में 'संख्या बल' ही सबसे बड़ी ताकत होती है। भारत की एक विशाल आबादी कृषि और मजदूरी पर टिकी है। इसके बावजूद, नीतियां बनाते समय इस वर्ग की आवाज सबसे धीमी सुनाई देती है। कनौजिया कहते हैं कि जिस दिन किसान और मजदूर अपनी जाति, धर्म और क्षेत्रीय भेदभाव को भुलाकर एक मंच पर आ गए, उस दिन सत्ता की दिशा और दशा दोनों बदल जाएगी। मालिक जब 'याचक' बन जाता है लेख का मुख्य...

यूपी में 'पाप' के बयान पर बिफरे किसान नेता: रोहित कुमार कनौजिया बोले- उपमुख्यमंत्री नैतिकता दिखाएं और इस्तीफा दे। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक औरउपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और किसान नेता के बीच जुबानी जंग तेज, राजनीति गर्मायी "मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं तो पाप के भागीदार आप भी", डिप्टी सीएम के बयान पर कनौजिया का करारा पलटवार

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बड़ी बहस: क्या सिर्फ बयानबाजी से धुल जाएंगे पाप?   ​आज किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मुद्दा था शंकराचार्य का अपमान। ​जहाँ एक तरफ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि "शंकराचार्य का अपमान करने वालों पर पाप पड़ेगा", वहीं दूसरी तरफ रोहित कुमार कनौजिया ने उन्हें आईना दिखाते हुए बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। ​  रोहित कुमार कनौजिया जी का सीधा प्रहार: ​"अगर आपको वाकई इतना बुरा लगा है, तो नैतिकता के आधार पर इस्तीफा क्यों नहीं दे देते? आप उसी मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं जहाँ ये सब हो रहा है, तो पाप के भागीदार तो आप भी हुए!" ​सत्ता में रहकर केवल बयान देना आसान है, लेकिन जिम्मेदारी लेना मुश्किल। क्या आप चाचा जी की इस बात से सहमत हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर दें। 👇 ​#UPPolitics #RohitKumarKanojia #BrajeshPathak #FarmerLeader #KisanShakti #UttarPradesh #PoliticalDebate

उन्नाव का बदलता सियासी मिजाजउन्नाव में कभी गूंजता था 'लाल सलाम', अब नई पीढ़ी के लिए अनजान हुआ वामपंथ

उन्नाव का बदलता सियासी मिजाज ​ उन्नाव में कभी गूंजता था 'लाल सलाम', अब नई पीढ़ी के लिए अनजान हुआ वामपंथ ​ पुरवा में 'साइकिल' की रफ़्तार बरकरार, पर भीखालाल का 'छक्का' आज भी एक अटूट रिकॉर्ड ​ उन्नाव। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन्नाव जिला हमेशा से ही दिलचस्प उलटफेरों का गवाह रहा है। लेकिन इस बार की चुनावी चर्चाओं के बीच एक कड़वा सच उभर कर सामने आया है— जिले की राजनीति से 'लाल झंडा' पूरी तरह गायब हो चुका है। जिस धरती ने बाबू भीखालाल जैसे दिग्गज को छह बार विधानसभा भेजा, आज वहां की नई पीढ़ी कम्युनिस्ट पार्टी के नाम तक से वाकिफ नहीं है। ​ तहसीलदारी छोड़ थामी थी जनसेवा की राह ​राजनीति के गलियारों में आज भी बाबू भीखालाल का नाम सम्मान से लिया जाता है। 1957 में तहसीलदार का पद त्याग कर राजनीति में आए भीखालाल ने हसनगंज (अब मोहान) क्षेत्र में ऐसी पैठ बनाई कि जनता ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठाया। ​ अजेय रिकॉर्ड: वह 1957, 1962, 1967, 1969, 1974 और 1980 में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। ​ विरासत का अंत: उनके बाद बाबू मस्तराम ने भाजपा के टिकट पर चार बार जीत दर्ज ...