शंकराचार्य पर सवाल उठाने वालों को किसान नेता रोहित कनौजिया का करारा जवाब

शंकराचार्य पर सवाल उठाने वालों को किसान नेता रोहित कनौजिया का करारा जवाब
जो किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया के तेवर और उनके तर्कों को बखूबी दर्शाता है
शंकराचार्य पर सवाल उठाने वालों को किसान नेता रोहित कनौजिया का करारा जवाब
नई दिल्ली लखनऊ: देश में धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब प्रखर किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया ने शंकराचार्यों के अपमान पर अपनी चुप्पी तोड़ी। कनौजिया ने उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरुओं की प्रामाणिकता और उनके निर्णयों पर उंगली उठा रहे हैं।
"डिग्री का ठिकाना नहीं और प्रमाण शंकराचार्य से?"
रोहित कुमार कनौजिया ने बेहद तीखे अंदाज में कहा कि आज देश में विडंबना की पराकाष्ठा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा:
> "बड़ी अजीब बात है कि जिन लोगों की अपनी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल हैं, जो आज तक जनता के सामने अपनी एक अदद डिग्री तक नहीं दिखा पाए, वे आज उन शंकराचार्यों से प्रमाण मांग रहे हैं जो शास्त्रों के साक्षात स्वरूप हैं।"
रोहित कुमार कनौजिया का इशारा उन राजनेताओं की ओर था जो धर्म और राजनीति के घालमेल में खुद को सर्वोपरि दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य का पद किसी चुनावी जीत का मोहताज नहीं होता, बल्कि वह कठोर तपस्या, शास्त्रार्थ और परंपरा की कसौटी पर कसा हुआ होता है।
सनातन की मर्यादा बनाम राजनीतिक अहंकार
किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया ने जोर देकर कहा कि हिंदू धर्म में शंकराचार्य का स्थान सर्वोच्च है। जब धर्म की व्याख्या की बात आती है, तो अंतिम निर्णय शास्त्र सम्मत होता है, न कि सत्ता सम्मत। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:
 * शास्त्रों का अपमान असहनीय: राजनीतिक लाभ के लिए धर्मगुरुओं को नीचा दिखाना भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।
 * दोगलापन: एक तरफ सनातन का झंडा बुलंद करने का दावा करना और दूसरी तरफ सर्वोच्च पीठों का अनादर करना जनता देख रही है।
 * किसान और संस्कार: रोहित कुमार कनौजिया ने कहा कि किसान मिट्टी से जुड़ा होता है और उसे अपने संस्कारों का ज्ञान है। हम अपने गुरुओं का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।
निष्कर्ष: सत्ता आती-जाती है, परंपराएं अमर हैं
लेख के अंत में रोहित कुमार कनौजिया ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि राजनीति को धर्म की दहलीज के बाहर ही रहना चाहिए। जो लोग आज सत्ता के मद में चूर होकर पूज्य पाद शंकराचार्यों पर टिप्पणी कर रहे हैं, उन्हें इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे ऐसे चेहरों को पहचानें जो धर्म का चोला ओढ़कर धर्म की ही जड़ें काटने का काम कर रहे हैं।

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